कर्नाटक

कर्नाटक सरकार को 125 करोड़ के आयरन ओर मामले में झटका

Kavita2
17 Aug 2026 10:51 AM IST
कर्नाटक सरकार को 125 करोड़ के आयरन ओर मामले में झटका
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कर्नाटक। कर्नाटक में खनन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट की सहायता करने वाली सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी (CEC) ने करीब 125 करोड़ रुपये के लौह अयस्क बिक्री मामले में राज्य सरकार के दावे को खारिज कर दिया है। कमिटी ने एस्क्रो अकाउंट में जमा करीब 125.47 करोड़ रुपये की राशि निजी कंपनी मिनरल एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड को जारी करने की सिफारिश की है। मामला कंपनी द्वारा निकाले गए करीब 6.53 लाख टन लौह अयस्क की बिक्री से प्राप्त रकम से जुड़ा है।

मिनरल एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड ने एस्क्रो खाते में जमा इस रकम को जारी कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दूसरी ओर कर्नाटक सरकार ने कंपनी के दावे का विरोध करते हुए इस राशि पर अपना अधिकार जताया था। अब सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी की सिफारिश से कंपनी को राहत मिली है, हालांकि इस मामले में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगा।

CEC सुप्रीम कोर्ट को पर्यावरण, वन और खनन से जुड़े विभिन्न मामलों में सहायता करती है। कर्नाटक में अवैध खनन और लौह अयस्क की बिक्री से जुड़े मामलों में भी कमिटी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में 125.47 करोड़ रुपये की राशि को लेकर उसकी सिफारिश महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मामले के केंद्र में करीब 6.53 लाख टन लौह अयस्क है, जिसका खनन मिनरल एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड ने किया था। इस लौह अयस्क की बिक्री से प्राप्त रकम एस्क्रो खाते में जमा की गई थी। कंपनी का कहना था कि बिक्री से प्राप्त राशि उसे दी जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर उसने शीर्ष अदालत का रुख किया।

कर्नाटक सरकार ने कंपनी की मांग का विरोध किया और इस राशि पर अपना दावा पेश किया। सरकार की दलीलों और कंपनी के पक्ष को देखने के बाद सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी ने राज्य के दावे को स्वीकार नहीं किया और रकम कंपनी के पक्ष में जारी करने की सिफारिश की।

इस मामले में एस्क्रो अकाउंट महत्वपूर्ण है। एस्क्रो व्यवस्था में विवादित या किसी शर्त से जुड़ी रकम को सीधे किसी एक पक्ष को देने के बजाय एक निर्धारित खाते में सुरक्षित रखा जाता है। बाद में कानूनी प्रक्रिया या सक्षम प्राधिकरण के निर्णय के आधार पर राशि संबंधित पक्ष को जारी की जाती है। इस मामले में भी लौह अयस्क की बिक्री से प्राप्त 125.47 करोड़ रुपये इसी तरह जमा किए गए थे।

CEC की सिफारिश के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। कमिटी की रिपोर्ट और सिफारिश अदालत के विचार के लिए रखी जाएगी। इसके बाद शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि एस्क्रो खाते में जमा रकम किसे और किन शर्तों पर जारी की जाए।

कर्नाटक में लौह अयस्क खनन लंबे समय से कानूनी और पर्यावरणीय निगरानी का विषय रहा है। अवैध खनन से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर कई महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। खनन गतिविधियों, उत्पादन, परिवहन और लौह अयस्क की बिक्री को लेकर विभिन्न व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके और नियमों के उल्लंघन पर रोक लगाई जा सके।

इसी पृष्ठभूमि में सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। कमिटी विभिन्न मामलों में उपलब्ध रिकॉर्ड, संबंधित पक्षों की दलीलों और अदालत के पूर्व आदेशों को ध्यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें देती है। मिनरल एंटरप्राइजेज के मामले में भी कमिटी ने राज्य सरकार और कंपनी के दावों का परीक्षण करने के बाद अपनी राय दी है।

करीब 125 करोड़ रुपये की बड़ी राशि होने के कारण इस मामले पर खनन क्षेत्र से जुड़े पक्षों की भी नजर है। अगर सुप्रीम कोर्ट CEC की सिफारिश को स्वीकार करता है तो मिनरल एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के लिए एस्क्रो खाते में जमा रकम प्राप्त करने का रास्ता साफ हो सकता है।

दूसरी ओर कर्नाटक सरकार के लिए कमिटी की सिफारिश झटके के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि राज्य ने इस रकम पर अपना दावा पेश किया था। हालांकि CEC की सिफारिश अंतिम न्यायिक आदेश नहीं है। राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर रहेगा और अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।

यह मामला खनन से जुड़े वित्तीय अधिकारों और बिक्री से प्राप्त राशि के स्वामित्व के सवाल को भी सामने लाता है। जब किसी खनिज की बिक्री न्यायिक निगरानी या विशेष व्यवस्था के तहत की जाती है, तब उससे प्राप्त रकम के वितरण के लिए निर्धारित नियमों और अदालत के आदेशों का पालन करना आवश्यक होता है।

मिनरल एंटरप्राइजेज ने अपनी याचिका में 6.53 लाख टन लौह अयस्क की बिक्री से प्राप्त 125.47 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की थी। कंपनी का दावा था कि यह राशि उसे मिलनी चाहिए। कर्नाटक सरकार के विरोध के बावजूद CEC ने कंपनी के पक्ष में रकम जारी करने की सिफारिश की है।

अब सभी की निगाह सुप्रीम कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर रहेगी। शीर्ष अदालत कमिटी की रिपोर्ट, राज्य सरकार की आपत्तियों और कंपनी की दलीलों पर विचार करने के बाद आदेश दे सकती है। अदालत का फैसला यह निर्धारित करेगा कि एस्क्रो खाते में लंबे समय से जमा राशि का अंतिम निपटारा किस तरह होगा।

फिलहाल CEC की सिफारिश ने मिनरल एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी राहत दी है। वहीं कर्नाटक सरकार का करीब 125.47 करोड़ रुपये पर किया गया दावा कमिटी के स्तर पर स्वीकार नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश के बाद ही इस रकम को जारी करने को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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